हर वर्ष 4 जनवरी को 'विश्व ब्रेल दिवस' (World Braille Day) मनाया जाता है। इसके आविष्कारक 'लुईस ब्रेल' है। लुई ब्रेल अंधेरे के महानायक, जो दृष्टिबाधितों के लिए एक वरदान के रूप में आए हैं।
आप सभी यह कल्पना कर सकते हैं की पूरी दुनिया अंधेरे में डूब जाए, लेकिन उसी के बीच एक आशा की किरण दिखाई दे, जो ऐसा रास्ता खोज निकाले जो करोड़ों लोगों के जीवन को रोशन कर दे। यह किसी काल्पनिक सुपर हीरो की कहानी नहीं बल्कि वास्तविक लुई ब्रेल की है। एक ऐसे सामान्य बालक की जिसने अपनी नजर खोने के बाद भी हर नहीं मानी और अंधेरे के महानायक के रूप में महान हुए।
आज हम इस ब्लॉक में जानेंगे, कि उसे प्रेरणादायक जीवनी के बारे में जिसे दुनिया भर के समस्त दृष्टिबाधित लोगों को लिखने-पढ़ने और सपने देखने की शक्ति प्रदान की।
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✍️एक दुर्घटना जिसने जीवन बदल दिया
फ्रांस के एक छोटे से गांव कूपर्वे (Coupvray) में 4 जनवरी 1809 को लुई ब्रेल का जन्म आम बच्चों जैसा हुआ था। लेकिन 3 साल की छोटी सी उम्र में ही अपने पिता के कार्यशाला में खेलते वक्त एक नुकीले औजार से उनकी आंख में चोट लग गई। संक्रमण बहुत ज्यादा फैल गया और धीरे-धीरे उनकी दोनों आंखों की रोशनी चली गई।
एक छोटा बालक, जिसके सामने अभी पूरी जिंदगी पड़ी थी अचानक अंधेरे में घिर गया और यहीं से अंधेरे में रोशनी खोजने के उनके सफर की शुरुआत हुई। ब्रेल ने कभी भी अपनी कमी को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।
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⭐ब्रेल लिपि: छह बिंदुओं का चमत्कार
उस दौर में दृष्टि बाधित या नजर से शुन्य लोगों के लिए शिक्षा के अवसर न के बराबर थे। जो किताबें पहले उपलब्ध होती थी, वह बहुत मोटी, भारी व कठिन उभरे हुए अक्षरों वाली होती थी। वह जानते थे कि अगर दृष्टिबाधित सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है, तो लिखने और पढ़ने का तरीका बदलना होगा। दृष्टिहीन लोगों के लिए शिक्षा को महत्व देना होगा।
लुई ने मात्र 15 साल की उम्र में चार्ल्स बॉर्बीयर की नाइट राइटिंग (सैन्य कोड) से एक गहरी प्रेरणा ली और उसमें कुछ सुधार करके अपनी एक खुद की लिपि विकसित की। जिसे आज हम "ब्रेल लिपि" के नाम से जानते हैं। इन्हें "ब्रेल लिपि के आविष्कारक" के रूप में जाना जाता है।
ब्रेल लिपि केवल 6 उबरे हुए बिंदुओं (Dots) आधारित लिपि थी। इन सभी 6 बिंदुओं के संयोजन से संख्याएं, अक्षर यहां तक की संगीत के सुर भी लिखे जा सकते थे। दुनिया भर के नेत्रहीनों के लिए यह आविष्कार एक क्रांतिकारी कदम साबित हुआ। अंधों के लिए ब्रेल लिपि (Braille Lipi) एक वरदान है। ब्रेल लिपि का इतिहास काफी पुराना है, जिसे वर्तमान में भी अपनाया जा रहा है।
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👨🦯नेत्रहीनों के मसीहा
लुई का यह आविष्कार रातों-रात स्वीकार नहीं किया गया था। उनको कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उनका विश्वास दृढ़ था। आज के इस दौर में उनके द्वारा निर्मित ब्रेल लिपि के कारण ही दुनिया भर के सभी दृष्टि बाधित लोग विज्ञान, साहित्य और तकनीक के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं।
इसी कारण से लुई ब्रेल को नेत्रहीनों के मसीहा के रूप में जाना जाता है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि दृष्टि का ना होना दृष्टिहीनता नहीं है; बल्कि असली दृष्टिहीनता तो सपनों और हौसलों का न होना होता है।
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☀️आज भी है 'उम्मीद की किरण'
आज लुई ब्रेल का जीवन हमें यह सिखाता है की परिस्थितियों चाहे कितनी भी विपरीत क्यों न हो इंसान की इच्छाशक्ति उससे कहीं बड़ी होती है। उनका यह आविष्कार आज भी दुनिया के करोड़ों लोगों के लिए उम्मीद की किरण बना हुआ है। वर्तमान समय में जब भी कोई दृष्टिबाधित लोग अपनी उंगलियों के पोरों से ज्ञान की दुनिया को छूता है, तो वह अनजाने में ही सही लुई ब्रेल को धन्यवाद जरूर देता है।
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📚निष्कर्ष:
लुई ब्रेल का जीवन परिचय मात्र एक कहानी ही नहीं, बल्कि एक मिसाल भी है जो हमें रास्ता दिखाती है। आइए, हम सभी दुनिया भर के लोग मिलकर इस महानायक को नमन करें जिन्होंने अपनी सीमाओं को लांघकर भी दुनिया को एक नई दृष्टि दी है। लुई ब्रेल की जीवनी से हमें भी बहुत कुछ सीखना चाहिए।
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- FAQ :-
Q.1 ब्रेल लिपि के जनक कौन है ?
Ans लुई ब्रेल
Q.2 लुई ब्रेल कहां के रहने वाले हैं ?
Ans फ्रांस में कूपर्वे के रहने वाले हैं।
Q.3 विश्व ब्रेल दिवस कब मनाया जाता है ?
Ans हर वर्ष 4 जनवरी को मनाया जाता है
Q.4 लुई ब्रेल ने किसकी खोज की ?
Ans लुई ब्रेल ने दृष्टि बाधित लोगों के लिए ब्रेल लिपि की खोज की।
Q.5 लुई ब्रेल ने अपने आंखों की रोशनी कैसे खोई ?
Ans एक बार लुई ब्रेल अपने पिताजी के कार्यालय में खेल रहे थे, इस दौरान एक नुकिला औजार उनकी आंखों में लग गया जिसके कारण वे संक्रमित हो गए और उनकी आंखें चली गई।
Q.6 लुई ब्रेल किसके जनक है ?
Ans ब्रेल लिपि के जनक है जो दृष्टिबाधितों के पढ़ने के लिए काम आती है।
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